सर रिचर्ड एटनबरो ने भारत के महानायक महात्मा गांधी पर एक फिल्म बनाई, 'गांधी' जो भारत में सन १९८२ में प्रदर्शित हुई. मोहनदास करमचंद गांधी को समझना जितना कठिन है, उससे अधिक कठिन था उनके जीवन पर आधारित फिल्म बनाना. व्यक्ति आधारित कथा पर फिल्म का कथानक तैयार करना गंभीर चुनौती होता है क्योंकि उसके चरित्र के साथ न्याय होना चाहिए. खास तौर से ऐसे व्यक्ति के जीवन यात्रा को सीमित अवधि की फिल्म में समेटना जो असंख्य घटनाओं का ऐसा गुलदस्ता हो जिसमें फूल, पत्ते और कांटे भी हों. सर रिचर्ड एटनबरो द्वारा निर्देशित फिल्म 'गाँधी' की पटकथा अमेरिकी लेखक जॉन ब्रिले ने तैयार की थी. फिल्म की शुरुआत ३० जनवरी १९४८ की एक शाम से होती है जिसमें गाँधी एक प्रार्थना सभा को संबोधित करने जा रहे हैं, तब ही एक दर्शनार्थी नाथूराम गोडसे उनकी खुली छाती में अपनी पिस्तौल से गोलियां उतार देता है. गांधी 'हे राम' कहते हुए धराशायी होकर अपने प्राण त्याग देते हैं. उनकी अंतिम यात्रा निकल रही है, लाखों लोगों का हुजूम उनको अश्रुपूरित विदाई दे रहा है और एक रेडिओ उद्घोषक गांधी के जीवन के बारे में विस्तार से बता ...
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