सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मार्च, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

काश्मीर फाइल्स

अंग्रेज कवि तथा चित्रकार विलियम ब्लेक ने कहा था, 'दुश्मन को माफ़ करना आसान है लेकिन दोस्त को माफ़ करना आसान नहीं होता.'  यूँ तो किसी ने हमारे दिल को धोखा दिया हो या तन-मन को हानि पहुंचाई हो, उसे हम आजीवन माफ़ नहीं कर पाते लेकिन दोस्त की दगाबाजी भुलाए नहीं भूलती. अविभाजित भारत में पहले हिन्दू और मुसलमान मिलजुल कर रहते थे, उसके बाद विभाजन का दौर आया, दोनों एक-दूसरे के दुश्मन हो गए. अधिकतर मुसलमान पाकिस्तान चले गए, हिन्दू भारत आ गए लेकिन भारत में एक पेंच फंस गया, कुछ मुसलमान आपनी धरती छोड़कर पाकिस्तान जाने के लिए तैयार नहीं हुए, उन्होंने इसी देश को अपनी धरती माना और यहीं डटे रहे. उन्हें गांधी पर भरोसा था कि वे उन्हें 'अपने' देश में बने रहने देंगे, वैसा हुआ भी. घोर साम्प्रदायिक विद्वेष के बावजूद जो मुसलमान भारत में रहना चाहते थे, उन्हें रहने की सुविधा मिली और धीरे-धीरे साम्प्रदायिक सद्भाव कायम हो गया. पुराने ज़ख्मों को भुलाकर भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बन गया. ध्यान देने वाली बात यह है कि शरीर में जब खुजली होती है तो वह सहलाने से शांत होती है परन्तु खुजलाने से और बढ़ती है, शरीर मे...